“आस पर विश्वास पर दुनिया टिकी है। मानती  हूं आज  काली  रात  है यह  चांद  ने  भी  आज  खींचे  हाथ  अपने , नींदें  भी  आती  नहीं ,आते न  सपने । किंतु  पूरब  में क्षितिज  पर आंख  मेरी  देखती  है स्वर्ण  की  रेखा  खींची है । आस  पर  विश्वास  पर दुनिया टिकी है।  “

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