मन के पंख..
ओ! जीवन के थके पखेरु बढ़े चलो हिम्मत मत हारो, पंखों में भविष्य बंदी है, मत अतीत की ओर निहारो। क्या चिंता धरती यदि छुटी , उड़ने को आकाश बहुत है, जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम विश्वास बहुत है ।

ओ! जीवन के थके पखेरु बढ़े चलो हिम्मत मत हारो, पंखों में भविष्य बंदी है, मत अतीत की ओर निहारो। क्या चिंता धरती यदि छुटी , उड़ने को आकाश बहुत है, जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम विश्वास बहुत है ।

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