What’s a fear you’ve overcome — and how did you do it?

मैंने कौन-सा डर जीता?

मैंने दूसरों की स्वीकृति की प्रतीक्षा करना छोड़ दिया।

एक समय था जब मैं सोचती थी—

“लोग क्या कहेंगे?”
“क्या मेरी सोच अलग तो नहीं?”
“क्या मेरी बातें लोगों को समझ आएँगी?”

फिर धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि जीवन का उद्देश्य सबको खुश करना नहीं, बल्कि अपने सच्चे स्वरूप को पहचानना है।

मैंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा, अपने विचार, अपनी कला और अपनी आवाज़ को दुनिया के सामने रखना शुरू किया।

डर एक दिन में नहीं गया, लेकिन मैंने उसे अपने निर्णयों पर हावी होने देना छोड़ दिया।

आज मैं पूर्ण होने की नहीं, सच्ची होने की कोशिश करती हूँ।

मैंने असफलता के डर को नहीं, बल्कि खुद होने के डर को जीता है।

और यह जीत तब मिली, जब मैंने स्वयं को स्वीकार करना सीख लिया।

“तत्त्वमसि” — तुम वही हो। जिस सत्य, शक्ति और प्रकाश को तुम बाहर खोज रहे हो, वह तुम्हारे भीतर ही है। ✨🌿

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