“समय सिर्फ हमारी उम्र नहीं बदलता, हमारी पसंद भी बदल देता है।”

अगर कोई मुझसे कुछ साल पहले पूछता कि क्या मैं कभी बिना चीनी की ब्लैक कॉफी पी पाऊँगी, रोज़ दही खाऊँगी, लौकी पसंद करूँगी या ड्रॉइंग करना पसंद करूँगी… तो मेरा जवाब होता—“कभी नहीं!”
लेकिन आज मैं मुस्कुराकर कहती हूँ—ज़िंदगी सच में हमें बदल देती है।
बचपन में मैं पूरी तरह चाय वाली इंसान थी। कॉफी मुझे बहुत कड़वी लगती थी और उसकी खुशबू भी खास पसंद नहीं थी। आज भी चाय मेरी पहली पसंद है, लेकिन अब कॉफी से भी प्यार हो गया है। अब मैं बिना चीनी की ब्लैक कॉफी भी आराम से पी लेती हूँ और उसका स्वाद मुझे अच्छा लगता है।
लौकी का नाम सुनते ही कभी मेरा चेहरा उतर जाता था। आज वही लौकी मुझे हल्की, स्वादिष्ट और हेल्दी लगती है।
दही तो मैं बिल्कुल नहीं खाती थी, लेकिन आज शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब मेरे लंच में दही न हो। अब तो लगता है कि दही के बिना खाना अधूरा है।
और कैचअप… जिसे मैं कभी हाथ तक नहीं लगाती थी, आज मेरे पसंदीदा स्नैक्स का सबसे अच्छा साथी बन गया है।
लेकिन सबसे बड़ा बदलाव खाने में नहीं, मेरे शौक में आया।
स्कूल के दिनों में मुझे ड्रॉइंग बिल्कुल पसंद नहीं थी। सच कहूँ तो मैं इससे बचती थी। शायद यही वजह थी कि 12वीं में मैंने बायोलॉजी नहीं ली। मुझे लगता था कि डायग्राम बनाना मेरे बस की बात नहीं है, इसलिए मैंने मैथ्स चुन ली।
किसे पता था कि कुछ साल बाद यही ड्रॉइंग मेरे सबसे पसंदीदा शौकों में से एक बन जाएगी!
आज मुझे मंडला आर्ट बनाना, रंगोली डिज़ाइन करना और नए-नए पैटर्न बनाना बेहद पसंद है। घंटों बैठकर रंगों के साथ समय बिताना मुझे सुकून देता है। जिस चीज़ से कभी मैं दूर भागती थी, वही आज मेरी खुशी का हिस्सा बन गई है।
तब समझ आया कि…
शायद चीज़ें नहीं बदलतीं, हम बदल जाते हैं।
हमारे अनुभव बदलते हैं, हमारी सोच बदलती है, हमारी प्राथमिकताएँ बदलती हैं। और फिर एक दिन हम उन्हीं चीज़ों में खूबसूरती ढूँढ लेते हैं, जिन्हें कभी नज़रअंदाज़ कर दिया था।
इसलिए अब मैं कभी यह नहीं कहती कि “मुझे यह चीज़ कभी पसंद नहीं आएगी।” क्योंकि ज़िंदगी ने मुझे सिखाया है कि समय के साथ दिल, आदतें और पसंद—तीनों बदल सकते हैं।
तो बताइए… ऐसी कौन-सी चीज़ है जिससे आप बचपन में नफ़रत करते थे, लेकिन आज उससे प्यार करते हैं?
हो सकता है, आपकी कहानी भी मेरी तरह ही प्यारी और हैरान कर देने वाली हो। 💛
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Written by: SHIVASHRI GUPTAA

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