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Continue reading →: मन के पंख
ओ! जीवन के थके पखेरु बढ़े चलो हिम्मत मत हारो, पंखों में भविष्य बंदी है, मत अतीत की ओर निहारो। क्या चिंता धरती यदि छुटी , उड़ने को आकाश बहुत है, जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम विश्वास बहुत है ।
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Continue reading →: मेरा डर और मैने कैसे जीता…?
What’s a fear you’ve overcome — and how did you do it? मैंने कौन-सा डर जीता? मैंने दूसरों की स्वीकृति की प्रतीक्षा करना छोड़ दिया। एक समय था जब मैं सोचती थी— “लोग क्या कहेंगे?”“क्या मेरी सोच अलग तो नहीं?”“क्या मेरी बातें लोगों को समझ आएँगी?” फिर धीरे-धीरे मुझे एहसास…
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Continue reading →: me to my 20 year old self…
प्रिय 20 साल की शिवाश्री,हर किसी को खुश करने की कोशिश मत करो। जो लोग सच में तुम्हारे हैं, वे तुम्हें तुम्हारी अच्छाइयों और कमियों दोनों के साथ स्वीकार करेंगे।तुम्हारी संवेदनशीलता कमजोरी नहीं है। यही तुम्हें दूसरों के दर्द को समझने और दिल से लिखने की क्षमता देती है।जीवन की…
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प्रिय 20 साल की शिवाश्री, हर किसी को खुश करने की कोशिश मत करो। जो लोग सच में तुम्हारे हैं, वे तुम्हें तुम्हारी अच्छाइयों और कमियों दोनों के साथ स्वीकार करेंगे। तुम्हारी संवेदनशीलता कमजोरी नहीं है। यही तुम्हें दूसरों के दर्द को समझने और दिल से लिखने की क्षमता देती…
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Continue reading →: अनुगच्छतु प्रवाह : जीवन को नदी की तरह बहना सीखो
“नदी कभी अपने रास्ते की चट्टानों से शिकायत नहीं करती, वह बस अपना मार्ग बनाती हुई आगे बढ़ जाती है।” “अनुगच्छतु प्रवाह” संस्कृत का यह छोटा-सा वाक्य अपने भीतर जीवन का एक गहरा रहस्य समेटे हुए है। “अनुगच्छतु” अर्थात् साथ चलो। “प्रवाह” अर्थात् बहाव, गति, निरंतर चलती हुई धारा। सरल…
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Continue reading →: “अहं ब्रह्मास्मि”
अहं ब्रह्मास्मि : अपनी वास्तविक शक्ति को पहचानो “जब तक शेर स्वयं को भेड़ समझता है, वह जंगल का राजा नहीं बन सकता।” “अहं ब्रह्मास्मि” — बृहदारण्यक उपनिषद् भारतीय दर्शन के सबसे महान महावाक्यों में से एक। इसका शाब्दिक अर्थ है— “मैं ब्रह्म हूँ।” लेकिन इसका अर्थ अहंकार नहीं है।…
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Continue reading →: “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” : हर दिशा से आने वाले शुभ विचारों का स्वागत करें
“एक दीपक दूसरे दीपक से प्रकाश लेता है,लेकिन उसका प्रकाश कम नहीं होता।ज्ञान भी ऐसा ही है—जितना बाँटो, उतना बढ़ता है।”संस्कृत मंत्र“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”— ऋग्वेद (1.89.1)हिन्दी अर्थ“हमारे पास संसार की सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार और श्रेष्ठ ज्ञान आते रहें।”कितना अद्भुत विचार है!हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषियों…
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Continue reading →: What I passionate about..
“I am a creative soul with a heart full of stories. Reading has always been my refuge, and storytelling — my way of connecting with the world. Whether it’s about life, love, or my own experiences, I find beauty in capturing emotions and turning them into words. For me, every…
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Continue reading →: आस पर विश्वास पर दुनिया टिकी है..
“आस पर विश्वास पर दुनिया टिकी है। मानती हूं आज काली रात है यह चांद ने भी आज खींचे हाथ अपने , नींदें भी आती नहीं ,आते न सपने । किंतु पूरब में क्षितिज पर आंख मेरी देखती है स्वर्ण की रेखा खींची है । आस पर विश्वास पर दुनिया…
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Continue reading →: मन के पंख …
“अभी न पूछो हमसे मंजिल कहां है? अभी तो हमने चलने का इरादा किया है.. न हारे हैं, न हारेंगे कभी हम, खुद से ही हमने ये वादा किया है।
